चाहा है मैंने__
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बुद्ध में खोकर
बुद्ध हो जाना
चाहा है मैंने
कितनी बार
बंद कपाट
अंधेरों में
की है मैंने
रोशनी की तलाशी..
स्वयं से दूर
स्वयं के करीब
तुममें खोकर
बुद्ध हो जाना
चाहा है मैंने!!

__ज्योति रीता
हिंदी प्राध्यापिका
एम.ए.,एम.एड.
रानीगंज, बिहार

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